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सेवा

गौ सेवा

गौमाता की रक्षा एवं सेवा।

हिंदू परंपरा में गाय केवल एक पशु नहीं — वह पवित्रता का जीवंत स्वरूप है। गौमाता सभ्यता की पोषिका हैं: उनका दूध पोषण देता है, उनकी उपस्थिति घर को पावन करती है, और उनकी सेवा को समस्त सृष्टि की सेवा के समान माना गया है।

बहुत समय तक गोपालन की यह पुण्य परंपरा हिंदू घरों से हटकर संस्थागत गौशालाओं तक सिमट गई — ऐसे स्थान, जो चाहे कितने ही सद्भाव से चलें, एक परिवार और उनकी पवित्र गाय के बंधन की बराबरी कभी नहीं कर सकते। गुरुदेव का आह्वान मूल की ओर लौटने का है: हर परिवार को गौशाला की आवश्यकता नहीं। हर परिवार को आवश्यकता है एक गाय की — एक जीवंत पावन उपस्थिति की, जो नित्य सेवा के माध्यम से बच्चों को धर्म सिखाती है।

गौशाला नहीं उपाय, एक हिंदू एक गाय

पूज्य गुरुदेव

सहभागिता कैसे करें

विकल्प 1
एक गोपालक परिवार को सहयोग दें

अनेक ग्रामीण परिवार गाय रखना चाहते हैं, किंतु गाय या उसके भरण-पोषण का व्यय नहीं उठा पाते। आपका दान किसी परिवार के लिए एक गाय की व्यवस्था कर सकता है — उन्हें गोपालन और उससे प्राप्त पुण्य का उपहार देकर।

गौ सेवा में सहयोग करें
विकल्प 2
अपने घर में एक गाय रखें

यदि आपकी परिस्थितियाँ अनुमति दें, तो अपना गोपालन आरंभ कीजिए। आरंभ कैसे करें, इसके मार्गदर्शन हेतु गुरुदेव अपने स्थानीय धाम सत्संग समूह या गौशाला से परामर्श की सलाह देते हैं।

मार्गदर्शन हेतु संपर्क करें