केवल एक मंदिर नहीं — एक ऐसा स्थान, जहाँ जीवन बदल जाते हैं।
कुछ स्थान वे होते हैं, जहाँ आप जाते हैं। और कुछ स्थान वे होते हैं, जो लौट आने के बाद भी सदा आपके साथ रहते हैं। बागेश्वर धाम दूसरी तरह का स्थान है।
श्री बागेश्वर बालाजी महाराज को समर्पित और पूज्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज के मार्गदर्शन में पल्लवित यह पावन परिसर, गढ़ा (छतरपुर) में आज भारत के सर्वाधिक प्रिय तीर्थस्थलों में से एक बन चुका है।
यहाँ देश के कोने-कोने से लोग आते हैं — सबके नाम अलग, प्रार्थनाएँ अलग, कहानियाँ अलग। और फिर भी, देहरी पर पैर रखते ही कुछ है, जो उन सबको मौन रूप से एक कर देता है।
कोई दर्शन के लिए आता है। कोई शांति के लिए। पर लौटते सभी बदले हुए हैं।
बागेश्वर धाम आने वाला हर व्यक्ति एक ही प्रार्थना लेकर नहीं आता। धाम यह नहीं पूछता कि आप क्यों आए हैं। वह बस अपने द्वार खोल देता है — और आने तथा लौटने के बीच कहीं, कुछ बदल जाता है।
एक गाथा, जो सदियों पहले आरंभ हुई। और आज भी लिखी जा रही है।
बागेश्वर धाम की कथा केवल पत्थरों में नहीं लिखी गई — वह श्रद्धालुओं की यात्राओं में जीवित है। पूज्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज के मार्गदर्शन में धाम सेवा में, गहराई में और भक्ति में निरंतर बढ़ा है।
श्री बागेश्वर बालाजी महाराज का विग्रह गढ़ा में धरती से स्वयं प्रकट हुआ। संन्यासी बाबा की तपस्या ने इस भूमि को एक तपोस्थली में बदल दिया।
भगवानदास गर्ग जी (संत सेतु लाल जी महाराज), पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के दादा, चित्रकूट से लौटकर मंदिर का पुनर्निर्माण करते हैं।
एक भव्य महायज्ञ का आयोजन होता है; श्री श्री 1008 गोले महाराज जी द्वारा स्थापित दिव्य दरबार को विधिवत पुनः प्रतिष्ठित किया जाता है।
दिव्य दरबार श्रद्धालुओं के लिए एक नियमित आयोजन बनता है — भारत के सबसे अधिक उपस्थिति वाले आध्यात्मिक आयोजनों में से एक का आरंभ।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज को बागेश्वर धाम का नेतृत्व सौंपा जाता है।
108 निर्धन कन्याओं के लिए एक ऐतिहासिक सामूहिक विवाह — सेवा, जो मंदिर की दीवारों से कहीं आगे तक फैली है।
देश के हर राज्य से और विश्व के अनेक देशों से श्रद्धालु आते हैं। यह कथा अभी पूरी नहीं हुई — हर तीर्थयात्री इसे आगे लिखता रहता है।
धाम का हर कोना आपके लिए कुछ न कुछ संजोए हुए है।
धाम केवल एक स्थान नहीं — यह अनेक स्थानों का समुच्चय है। प्रार्थना और मौन के स्थान, सभागार जहाँ कथाएँ भीड़ को स्तब्ध कर देती हैं, उद्यान जहाँ संसार की गति धीमी पड़ जाती है। धीरे चलिए।
बागेश्वर धाम तक आपकी यात्रा।
पता: बागेश्वर धाम सरकार, ग्राम गढ़ा, पोस्ट-गंज, ज़िला छतरपुर, मध्य प्रदेश — 471105। खजुराहो–पन्ना मार्ग पर, छतरपुर से ~25 किमी।
दर्शन: सभी दिन, प्रातः 7:30 – रात्रि 9:00 (पर्वों और दिव्य दरबार के अवसर पर समय बदल सकता है)। श्रद्धालु हेल्पलाइन: +91 70550 05553 / 05554 · ईमेल: bageswardhams@gmail.com।
परिसर में सुविधाएं: पार्किंग, RO पेयजल, शौचालय, प्रसाद, जूता-चप्पल रखने की व्यवस्था, व्हीलचेयर सुगम्यता, चिकित्सा सहायता, विद्युत बैकअप, और CCTV एवं सुरक्षा।
धाम तक कैसे पहुँचें
अपनी यात्रा से पहले हर वह बात, जो आप जानना चाहेंगे।
क्या बागेश्वर धाम में प्रवेश के लिए कोई शुल्क है?
नहीं। बागेश्वर धाम सभी श्रद्धालुओं के लिए पूर्णतः निःशुल्क खुला है। नित्य दर्शन और दिव्य दरबार में सम्मिलित होना, दोनों निःशुल्क हैं।
दर्शन का समय क्या है?
नित्य दर्शन प्रातः 7:30 से रात्रि 9:00 बजे तक, वर्ष के हर दिन खुला रहता है। पर्वों और दिव्य दरबार के दौरान समय में परिवर्तन हो सकता है।
दर्शन के समय क्या पहनना चाहिए?
श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे शालीन और सम्मानजनक वस्त्र पहनें। कोई कठोर वस्त्र-संहिता नहीं है, किंतु सुविधाजनक पारंपरिक परिधान सराहनीय है।
क्या फ़ोटोग्राफ़ी की अनुमति है?
पूजा के समय मंदिर के भीतर फ़ोटोग्राफ़ी की अनुमति नहीं है। परिसर के खुले क्षेत्रों में अनुमति हो सकती है — कृपया स्वयंसेवकों के मार्गदर्शन का पालन करें।
मैं दिव्य दरबार में कैसे सम्मिलित हो सकता/सकती हूँ?
दिव्य दरबार घोषित तिथियों पर आयोजित होता है। प्रवेश के लिए एक निःशुल्क टोकन आवश्यक है, जो पूर्व-घोषित तिथि पर धाम में वितरित होता है। वर्तमान में कोई ऑनलाइन पंजीकरण नहीं है। संपूर्ण प्रक्रिया के लिए ‘अनुभव’ पृष्ठ देखें।
मैं अर्जी कैसे लगाऊँ?
अर्जी बालाजी महाराज को अर्पित आपकी प्रार्थना है, जो नारियल के माध्यम से, वैध टोकन के साथ दिव्य दरबार के दौरान लगाई जाती है। प्रक्रिया के लिए ‘अनुभव’ अनुभाग देखें।
क्या पार्किंग उपलब्ध है?
हाँ। श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग उपलब्ध है। दिव्य दरबार और बड़े पर्वों के दौरान भीड़ एवं यातायात प्रबंधन रहता है — जल्दी पहुँचें और स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करें।
बागेश्वर धाम के निकट कहाँ ठहर सकता/सकती हूँ?
धाम के आसपास और छतरपुर शहर में ठहरने के विकल्प उपलब्ध हैं। विशेषकर दिव्य दरबार और पर्वों के दौरान पहले से योजना बनाएं। मार्गदर्शन हेतु हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
क्या वरिष्ठ नागरिकों या दिव्यांगों के लिए सुविधाएं हैं?
हाँ। व्हीलचेयर सुगम्यता और सहायता उपलब्ध है। कृपया यात्रा से पूर्व हेल्पलाइन पर संपर्क करें, ताकि व्यवस्थाएं पहले से की जा सकें।
क्या भोजन उपलब्ध है?
हाँ। प्रसाद उपलब्ध है, और अन्नपूर्णा रसोई सेवा-भाव से भोजन उपलब्ध कराती है। आसपास के क्षेत्र में भी भोजन उपलब्ध है।
क्या मैं लाइव ऑनलाइन देख सकता/सकती हूँ?
हाँ। लाइव दर्शन और दिव्य दरबार आधिकारिक YouTube और Facebook चैनलों पर प्रसारित होते हैं। कार्यक्रम और लिंक के लिए ‘लाइव’ अनुभाग देखें।



