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एक सिद्ध पीठ · छतरपुर, म.प्र.
एक सिद्ध पीठ · छतरपुर, म.प्र.

श्री बागेश्वर धाम

एक सिद्ध पीठ, जहाँ चमत्कार अपवाद नहीं, वचन हैं।

केवल एक मंदिर नहीं — एक जीवंत आध्यात्मिक शक्ति

छतरपुर के गढ़ा में झाँसी–खजुराहो राजमार्ग पर स्थित यह भूमि दो स्वयंभू विग्रहों का धाम है — श्री बालाजी महाराज और बागेश्वर महादेव — सनातन परंपरा के दो सर्वश्रेष्ठ रक्षकों की अभिन्न कृपा।

चंदेल राजवंश के युग से चली आ रही एक सिद्ध पीठ के रूप में मान्य, यह भूमि सदियों से पीड़ितों की शरण, ज़रूरतमंदों के लिए आशीर्वाद का स्रोत, और वह अग्नि रही है जो सनातन संस्कृति के दीप को प्रज्वलित रखती है।
कृपा की परंपरा

300 वर्षों की अखंड परंपरा

~300 वर्ष पूर्व
श्री संन्यासी बाबा

दिव्य दरबार परंपरा और मूल बालाजी मंदिर के संस्थापक।

निर्मोही अखाड़ा
श्री दादा गुरुजी

गुरुदेव के दादा, जिन्होंने उन्हें भक्ति के मार्ग पर चलाया।

आज
पूज्य गुरुदेव

पीठाधीश्वर और दिव्य सिद्धि के धारक — बालाजी की कृपा के पर्चे।

आराध्य देव

जहाँ हनुमान और शिव साथ विराजते हैं

श्री बालाजी महाराज
श्री बालाजी महाराज · हनुमान

प्रमुख देव — एक स्वयंभू विग्रह, ब्रह्मांडीय शक्ति, करुणा और रक्षा का जीवंत स्वरूप। इस कलियुग में हनुमान जी यहाँ अपने सर्वाधिक सक्रिय और तत्पर रूप में विराजमान हैं, और सच्चे हृदय से आने वालों की प्रार्थनाएँ पूर्ण करते हैं।

बागेश्वर महादेव
बागेश्वर महादेव · शिव

निकट ही बागेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है — भगवान शिव, दुखों के संहारक और मोक्ष के दाता। धाम का नाम ही इसी सान्निध्य से लिया गया है। शिव और हनुमान की अभिन्न कृपा इस भूमि को दोहरे आशीर्वाद से युक्त करती है।

दृष्टि एवं ध्येय

हर हृदय में सनातन; सीमाओं से परे सेवा

एक ऐसा संसार जहाँ कोई हिंदू भूखा या असहाय न रहे, जहाँ जाति और वर्ग सामूहिक भक्ति की ऊष्मा में घुल जाएँ, और जहाँ भारत — विश्व गुरु के रूप में — मानवता को पुनः सत्य, करुणा और उद्देश्य की ओर ले चले।

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